श्री परशुराम जी महादेव मंदिर

 घणी खम्मा दोस्तों, जय राजस्थान

राजसमन्द दर्शन की अगली कड़ी में आपके सामने ऐसी जगह लेकर आया हूँ, जिसको मेवाड़ का अमरनाथ कहते हैं, क्योंकि इसका स्वरूप बिल्कुल वैसा ही है जैसा अमरनाथ गुफा का है, वैसी ही हरभरी पहाड़ियां, वैसी ही चढ़ाई, और वैसी ही दो पहाड़ियों के बीच मे गुफा और उसमें विद्दमान शिवलिंग।

इस जगह का नाम है श्री परशुराम जी महादेव, जो कि पाली और राजसमन्द दोनों ही जिलों में स्तिथ है, इसकी चढ़ाई जहां से शुरू होती है वह स्थान राजस्थान के पाली जिले के अंतर्गत आता है, लेकिन जो मुख्य गुफा है वो राजसमन्द जिले में स्थित है,

परशुराम महादेव मन्दिर
परशुराम महादेव मन्दिर

यहां जाने के 2 रास्ते हैं , एक जो पाली जिले के देसूरी और फिर रणकपुर होकर जाता है, दूसरा जो राजसमन्द के कुम्भलगढ़ से थोड़ा आगे से है( इसमें खड़ी ढलान और खड़ी चढ़ाई है, उतरना चढ़ना थोड़ा मुश्किल होता है)। ट्रेकिंग के दीवानों के लिए भी ये 3 km (600 सीढ़ियों सहित) का रास्ता एक अच्छा ट्रेकिंग पॉइंट है।

श्रावण मास में यहाँ का प्राकृतिक सौंदर्य बरबस ही मनमोह लेता है, चारों और पहाड़ियों में बाबा परशुराम और हर हर महादेव के गूंजते नारे तनबदन को अनोखे जोश से सराबोर कर देते हैं। सच कहें तो यहां का नयनाभिराम दृश्य हमें बार बार वहीं रुकने को प्रेरित करता है। बेहद अलौकिक अनुभूति होती है यहाँ।

श्री परशुराम जी महादेव मंदिर
श्री परशुराम जी महादेव मंदिर
श्री परशुराम जी महादेव मंदिर
श्री परशुराम जी महादेव मंदिर
श्री परशुराम जी महादेव मंदिर
श्री परशुराम जी महादेव मंदिर

प्रकृति की गोद मे बसा हुआ ये मेवाड़ का अमरनाथ अभी राजस्थान में और राजस्थान के बाहर इतना प्रसिद्ध नही हुआ है, फिर भी आसपास के जिलों के लोगों का रेला लगा रहता है, श्रावण मास में भीड़ अत्यधिक रहती है, अगर आपको भीड़ से परहेज नही है तो श्रावण मास में पधारें अन्यथा गुमने के लिहाज से श्रावण मास के बाद से लेकर फरवरी/मार्च तक का समय सबसे उपयुक्त रहेगा।

यहां तक पहुंचने के लिए सबसे नजदीकी हवाई अड्डा और रेलवे स्टेशन उदयपुर है, बस या टैक्सी से जाने के लिए आप उदयपुर/पाली / राजसमन्द से जा सकते हैं। विश्व प्रसिद्ध कुम्भलगढ़ का किला, कुम्भलगढ़ वन्यजीव अभ्यारण्य और रणकपुर जैन मंदिर ( अपनी हस्तशिल्प और वास्तुकला के लिए विख्यात) यहां से बिल्कुल करीब है,

इन स्थानों का ट्यूर आपको राजस्थान के लिए अलग ही सोचने पर मजबूर कर देगा।

नोट- सूर्यास्त के बाद चढ़ाई करने से परहेज करें, कई बार भालू, पैंथर आदि वन्यजीव दिन ढलने के बाद यात्रा मार्ग में आ जाते हैं।दिन में कोई खतरा नही है।

Post by Rantan Bagwan

Shree Parshuram Mahadev Cave Temple ( Main )


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